ऋतु आए फल होय/ Ritu Aye Phal Hoy

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प्रत्येक समाज में विभिन्न समस्याएँ होती हैं। अनेक अड़चनें होती हैं। क्लिष्ट प्रश्न, संकट होते हैं। राजर्षि शाहु महाराजा में समाज की ऐसी समस्याओं आदि को सुलझाने का एक विलक्षण कौशल था। विशेषतः जो लोग दुर्बल, शोषित और असहाय होते थे, उन्हें धीरज देना, आधार देना और उनके दुःख दूर करने जैसी बातों को वे हमेशा प्राधान्य देते रहते थे। अग्रक्रम देते थे। हमारे समक्ष जो कहानियाँ हैं, इन सभी कहानियों से महाराजा के इस कारुण्यमय कौशल का दर्शन होता है।

Pages: 128

Description

‘ऋतु आए फल होय’ कहानी संग्रह की कथाएँ समाज के सभी घटकों को प्रेरणा देनेवाली हैं। यद्यपि ये एक राजा की चारित्रिक विशेषताओं को व्यक्त करनेवाली कहानियाँ हैं तो भी वस्तुतः एक सहृदय और संवेदनशील मन के मनुष्य का करुणामय आचरण भी प्रस्तुत करती हैं। आज की युवा पीढ़ी को सीखने जैसा इन कहानियों में बहुत कुछ हैं। कैसे बात करे, कैसे आचरण करे, शिष्टाचार का पालन कैसे करे, दीनदुर्बलों के साथ कैसा व्यवहार करे, होनहार लोगों को प्रोत्साहन कैसे दे, ऐसी अनगिनत बातें राजर्षि शाहू महाराजा के व्यक्तित्व तथा कार्य द्वारा सीख सकते हैं। डॉ. पद्मा पाटील ने महाराजा के जीवन के चुनिंदा प्रसंगों का चयन कर उन्हें कहानियों के स्वरूप में प्रस्तुत करने से संपूर्ण संग्रह रंजक हुआ है। इतिहास की तोड़मरोड़ न करते हुए, सत्य का अपलाप न करते हुए, लालित्य का आश्रय लेकर उन्होंने इतिहास का ही कथन किया है।

डॉ. आ.ह.साळुंखे

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